पंडित चंद्रकांत आप्टे
हर शाम ‘सा’ से शुरू होती है।
गुरुजी के नाम पर संगीत प्रतियोगिता।
जिस गुरु का शिष्य शास्त्रीय गायन और भजन, दोनों वर्गों में पुरस्कार पाएगा, उन गुरु को ₹ 5,000 का सम्मान पुरस्कार दिया जाएगा.
प्रायोजक 
आयोजन समिति: Dr Ragini Bhushan · Prof. Pankaj Kumar Jha · Dr Sanatan Deep · Satyaprakash Tiwari · Birendra Upadhyay · Rajesh Thakur · Shankarnath Jha
जूनियर
8 से 12 वर्ष
सीनियर
13 से 18 वर्ष
सुपर सीनियर
19 से 25 वर्ष
इस्पात नगरी के गुरुजी।

गुरुजी का घर जमशेदपुर के सोनारी में स्वरगंगा नाम का था। इस नाम का अर्थ है सुरों की नदी, और यह नाम बिल्कुल सही था: वहीं से उन्होंने गायकों की कई पीढ़ियाँ तैयार कीं, जिनमें कुछ पार्श्वगायक हैं जिनकी आवाज़ आज इस्पात नगरी से बहुत दूर तक सुनी जाती है।
परिवार गुरुजी की पूरी कहानी लिख रहा है। वह यहाँ प्रकाशित होगी।
तीनताल: एक आवर्तन, चार साँसें।
समय-रेखा तीनताल के रूप में बनी है: भारतीय शास्त्रीय संगीत की सोलह मात्राओं का आवर्तन। सम वह जगह है जहाँ हर आवर्तन लौटता है। खाली, यानी खाली मात्रा, वह मौन है जो लय को साँस देता है।
किसी मात्रा को छूकर उसका पड़ाव पढ़ें।
रागों के अनुसार रिकॉर्डिंग।
परिवार गुरुजी की रिकॉर्डिंग जुटा रहा है। वे यहाँ राग और प्रहर के अनुसार दिखेंगी।
बढ़ती हुई परंपरा।
गुरुजी का हर शिष्य, और उन शिष्यों के हर शिष्य।
नाम परिवार द्वारा दिए गए अनुसार। और नाम जोड़े जाएँगे, हर शिष्य की सहमति से।
क्या आपने गुरुजी से सीखा, या उनके किसी शिष्य से?
हमें अपना नाम बताएँचेहरे, मंच और रियाज़ की लंबी शामें।

एक दीया जलाएँ। एक याद छोड़ें।
दीया जलाने के लिए उसे छुएँ। शिष्यों और मित्रों की यादें जल्द जोड़ी जाएँगी।
आज हम गुरुजी के लिए एक दीया जलाते हैं। जलाने के लिए उसे छुएँ।
आज हम गुरुजी को याद करते हैं। उनके लिए एक दीया जलाएँ: एक दीये को छुएँ।

एक शिष्य के शब्द
जन्मदिवस पर सादर नमन, गुरुदेव
आज आपके जन्मदिवस पर आपकी बहुत याद आ रही है, गुरुदेव।
आप भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन आपके दिए हुए संगीत के संस्कार, आपकी शिक्षा और आपका आशीर्वाद हमेशा मेरे साथ रहेंगे।
आप सिर्फ मेरे संगीत गुरु ही नहीं, बल्कि मेरे जीवन के उन अनमोल व्यक्तित्वों में से एक हैं, जिन्होंने मुझे संगीत के साथ-साथ जीवन को समझना भी सिखाया।
आपकी सीख मेरे सुरों में, आपकी यादें मेरे दिल में और आपका आशीर्वाद मेरी हर साधना में हमेशा जीवित रहेगा।
जन्मदिवस पर आपको शत-शत नमन, गुरुदेव।
आप जहाँ भी हों, मेरा कोटि-कोटि प्रणाम स्वीकार करें।
ये अग्नि मोहंती के अपने शब्द हैं।