२गुरुजी
इस्पात नगरी के गुरुजी।

गुरुजी का घर जमशेदपुर के सोनारी में स्वरगंगा नाम का था। इस नाम का अर्थ है सुरों की नदी, और यह नाम बिल्कुल सही था: वहीं से उन्होंने गायकों की कई पीढ़ियाँ तैयार कीं, जिनमें कुछ पार्श्वगायक हैं जिनकी आवाज़ आज इस्पात नगरी से बहुत दूर तक सुनी जाती है।
उनका घरस्वरगंगा, सोनारी
उनका जीवनसतहत्तर वर्ष
हर वर्षपंडित चंद्रकांत आप्टे संगीत समारोह
परिवार गुरुजी की पूरी कहानी लिख रहा है। वह यहाँ प्रकाशित होगी।
३सोलह मात्राओं में जीवन
तीनताल: एक आवर्तन, चार साँसें।
समय-रेखा तीनताल के रूप में बनी है: भारतीय शास्त्रीय संगीत की सोलह मात्राओं का आवर्तन। सम वह जगह है जहाँ हर आवर्तन लौटता है। खाली, यानी खाली मात्रा, वह मौन है जो लय को साँस देता है।
किसी मात्रा को छूकर उसका पड़ाव पढ़ें।
सम · Dha इस मात्रा का पड़ाव जल्द जोड़ा जाएगा।